अखबार सा

कभी लगता है जग मैं मुझे छोड़सब ज्ञानी है, दुनियादारी समझते हैं,शायद हर रोज़ अखबार पढ़ते है । पर अखबार के बारे में सोचो तो,ज्ञान का भंडार, दुनिया का आईना,पर जिंदगी मानो सिर्फ ईक दिन की,कल उसकी जगह नया अखबार लेगा । और बस कहीं कोने में वह बैठा मिलेगा,कोई एक मामूली कागज़ की तरह… Continue reading अखबार सा

ईक और दिन आज बीत गया

ईक और दिन आज बीत गयाईक और रात आज जाएगी ।आज फिर दिन शुरू हुआ था दोपहर सेयह बात अब पूरा सप्ताह सताएगी ॥ याद तक नहीं सूरज का ढलना,जिंदगी बस कट रही है, जी नहीं जा रही ।न जाने कब शाम मुझे, बेवजह टहलता पायेगी । पर मना लेता हूं खुद को हर बार,सिर्फ… Continue reading ईक और दिन आज बीत गया

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