नन्हे बालक की चिड़िया

मैं बालक नन्हा, नादानी में, चिड़िया लेकर आया हूं। क्या बतलाउ उस चक्कर में फिर कितना पछताया हूं ॥ उसको भाए ये मन मेरा, मैं उसके गीत पे पगलाया हूं। आई है मर्ज़ी से अपने, न कुछ समझाया फुसलाया हूं॥ चाहे वक्त की बारिश हो या हो छींटे अनबन के, मैं हमेशा उसका भीगा छाता… Continue reading नन्हे बालक की चिड़िया

कोरोना काल

काम नहीं है अब तो कोई क्यों न इक काम किया जाए।करते है जो काम, क्यों न उन्हें ही बदनाम किया जाए॥ प्रशासन कुछ भी न कर पाए चलो माना वह वाजिब है।कमाई की तिहाई देने वालो से क्यों न उम्मीद किया जाए॥ जान का जोख़िम है माना, उसमे भी भला बुराई है कोई क्या… Continue reading कोरोना काल

अब मन नहीं करता

डरता रहा हूं आगाजों से इतना, अब डरने का मन नहीं करता ।चाह बाकी है मंजिल की मगर, अब चलने का मन नहीं करता ॥ बेताब हो रहा था यह पंछी दिल में उड़ने को बचपन से ।कैद से हो गया ऐसा लगाव, अब उड़ने का मन नहीं करता ॥ बदलना चाहता था मैं पागल,… Continue reading अब मन नहीं करता

पापा के ६०वे जन्मदिन पर

तोहफ़ा दूं तो क्या दूं समझ नही आता, देना जरूरी भी है क्या समझ नही आता, जिंदगीभर बस लेता रहा हूं जिनसे, उन्हें मैं क्या ही दूं, पता नही चल पाता॥ शायद मेरा मुझसा ही होना तोहफ़ा है उनका, शायद मेरा सुकून से जीना ही सुकून है उनका, शायद मेरा वजूद ही है उनका जीना… Continue reading पापा के ६०वे जन्मदिन पर

आदत हो गई है अब

आदत हो गई है अब,बिन आदत ज़िंदगी बिताने की। अब ना रहा है कुछ जिसकी बची तलब है,समझ आ गया कि दुनिया में सब बेमतलब है। गिरने से बचाई थी चिड़िया को जिसे बिल्ली खा गई,खुदको जीने को समझा ही रहा था कि मौत आ गई। बहुत गरुर है उसे, वक्त समझता है खुदको ही… Continue reading आदत हो गई है अब

क्या कहना चाहता हूं

मत पूछो कि मैं क्या कहना चाहता हूं,धोखे में था, धोखे में रहना चाहता हूं। मत दिखाओ तुम मुझे यह आइना,आइने के उस पार रहना चाहता हूं। नाव की भला अपनों से क्या दिल्लगी,समंदर के उस पार रहना चाहता हूं। गांव था, जब उससे उब गया था मैं,खंडर हुआ तो अब रहना चाहता हूं। आंधी,… Continue reading क्या कहना चाहता हूं

बड़े पापा को, पापा की तरफ से

चलो आज फिर से वही काम करते है,आज फिर अतीत में चलो साथ चलते है ।चलो छिप जाते है फिर से मुखोंटो के बीच,बेवजह एक और दिन बर्बाद करते है ॥ वह रातें याद है जब, मिलने आया करते थे,न आंखे, न बातें बंद हो पाती थी मेरी,सोच कर के सुबह न मिल पाएंगे शायद,हो… Continue reading बड़े पापा को, पापा की तरफ से

याद नहीं

याददाश्त कमज़ोर है, पुरानी बात कोई याद नहीं,मिले है उतना यकीन है मगर मुलाकात याद नहीं। हां, गलती करी ही होगी गर तुम कह रहे हो तो,मगर सच बताऊं तो झगड़े की शुरुआत याद नहीं। मैं टूटा हूं पहले भी, संभला भी हूं कई बार,मगर तुम बदनाम हो वह तो अच्छी बात नहीं। नहीं हूं… Continue reading याद नहीं

दिया

बताने की पहले भी कोशिश कर चूका हूं।नज़दीकी सब को तबाह कर चुका हूं ॥ मुझे उजालों से ही याद रखना ए दुनिया,झांक न लेना जो अंधेरा छुपाए रखा हूं। ज़रूरत न पूछो, उसके बिना न ज़िंदा हूं,और न आंधी भी उसकी बर्दास्त कर रहा हूं । ज़हर घुल रहा है ज़िंदगी में मेरी बूंद… Continue reading दिया

कुछ बच्चे भी ना

नहीं जानता किस बात का उन्हें इतना तो नाज़ है,जादूगर है, बिना कुछ किये भी वह मशरूफ रहते है। इक काम जो कर लो, चिल्लाते रहते हो दिन भर,वह तुम्हारे बोज़ के साथ पूरी दुनिया चलाती थी। दिनभर दाद देते रहते हो तस्वीरों की झुर्रियों को,सामने चहेरे पर शिकन गाढ़ी हो रही है अरसे से।… Continue reading कुछ बच्चे भी ना